1857 की क्रांति के नोट्स pdf उन छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री में से एक है जो यूपीएससी, एसएससी, राज्य पीसीएस, रेलवे, रक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
1857 के विद्रोह के मुख्य बिंदुओं को प्रस्तुत करता है, जिसे इन नामों से भी जाना जाता है:
- भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
- सिपाही विद्रोह
यह विद्रोह भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ पहला बड़े पैमाने पर संगठित विरोध था।
1857 का विद्रोह क्या था?
नोट्स के अनुसार, 1857 का विद्रोह था:
- एक सैन्य विद्रोह
- इसे राजाओं, रानियों, किसानों, सैनिकों और आम नागरिकों का समर्थन प्राप्त था
- इसका उद्देश्य अंग्रेजों के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक वर्चस्व को समाप्त करना था
हालाँकि यह सैन्य रूप से विफल रहा, लेकिन इसने भारतीय इतिहास की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया।
1857 की क्रांति को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहा जाता है?
स्पष्ट रूप से बताता है कि:
- यह केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था।
- इसमें कई नेता और केंद्र शामिल थे।
- इसने ब्रिटिश सत्ता को सीधी चुनौती दी।
पहले के आदिवासी या स्थानीय विद्रोहों के विपरीत, इस आंदोलन का चरित्र राष्ट्रीय था, जो इसे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
विद्रोह की शुरुआत: तात्कालिक कारण
- एनफील्ड राइफल विवाद
तात्कालिक कारण एनफील्ड राइफल का मुद्दा था।
- ऐसी अफवाह थी कि नए कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है।
- लोड करने से पहले सैनिकों को कारतूस को दांतों से काटना पड़ता था।
इससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची:
- हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं (गाय पवित्र है)।
- मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं (सूअर वर्जित है)। इससे भारतीय सैनिकों में गहरा गुस्सा पैदा हो गया।
- मंगल पांडे की भूमिका
मंगल पांडे को विद्रोह की पहली चिंगारी बताया गया है।
- तारीख: 29 मार्च 1857
- स्थान: बैरकपुर, बंगाल
- रेजीमेंट: 34वीं इन्फैंट्री
मंगल पांडे ने ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला किया और खुले तौर पर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। इस कृत्य ने पूरे भारत के सैनिकों को प्रेरित किया।
- विद्रोह की औपचारिक शुरुआत
विद्रोह आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ:
- 10 मई 1857 को
- मेरठ में
मेरठ से विद्रोही दिल्ली की ओर बढ़े और बहादुर शाह जफर को भारत का बादशाह घोषित कर दिया।
1857 के विद्रोह के प्रमुख कारण
1857 की क्रांति कारणों को चार प्रमुख प्रकारों में बांटता है।
1. राजनीतिक कारण
- हड़प नीति (Doctrine of Lapse): लॉर्ड डलहौजी द्वारा शुरू की गई इस नीति ने अंग्रेजों को उन राज्यों पर कब्जा करने की अनुमति दी जहां राजा का कोई अपना वारिस (बेटा) नहीं था। इस नीति के तहत झांसी, सतारा और नागपुर जैसे राज्यों को हड़प लिया गया। इससे भारतीय शासक बहुत नाराज थे।
- अवध का विलय: कुशासन का आरोप लगाकर अवध को छीन लिया गया। इससे हजारों सैनिक और जमींदार बेरोजगार हो गए, जिससे भारी असंतोष पैदा हुआ।
2. आर्थिक कारण
ब्रिटिश शासन के तहत आर्थिक शोषण को स्पष्ट करता है:
- भारी कर (Tax)
- भारतीय हस्तशिल्प का विनाश
- किसानों का शोषण
- भारत के धन का ब्रिटेन जाना
भारतीय कारीगरों की नौकरियां चली गईं और किसान गरीबी में फंस गए, जिससे व्यापक गुस्सा फैल गया।
3. सामाजिक और धार्मिक कारण
अंग्रेजों ने कई सामाजिक सुधार पेश किए जैसे:
- सती प्रथा का अंत
- विधवा पुनर्विवाह अधिनियम
हालाँकि ये प्रगतिशील कदम थे, लेकिन कई भारतीयों ने इसे अपने धार्मिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप और पारंपरिक संस्कृति के लिए खतरा माना।
- धर्म परिवर्तन का डर: ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों ने यह डर पैदा कर दिया कि भारतीयों को जबरदस्ती ईसाई बना दिया जाएगा। इस डर ने हिंदुओं और मुसलमानों को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट कर दिया।
4. सैन्य कारण
भारतीय सैनिकों को सामना करना पड़ा:
- ब्रिटिश सैनिकों की तुलना में कम वेतन
- भेदभाव
- प्रमोशन के अवसर न मिलना
अंत में एनफील्ड राइफल के मुद्दे ने सैनिकों के बीच विद्रोह भड़का दिया।
विद्रोह के प्रमुख केंद्र और नेता
मुख्य केंद्रों और नेताओं की सूची स्पष्ट रूप से दी गई है:
- दिल्ली: बहादुर शाह जफर (नाममात्र के नेता), बख्त खान (सैन्य कमांडर)। दिल्ली विद्रोह का प्रतीकात्मक केंद्र बन गया।
- झांसी: रानी लक्ष्मीबाई। उन्होंने प्रसिद्ध घोषणा की: “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।” वह ब्रिटिश सेना के खिलाफ बहादुरी से लड़ीं।
- कानपुर: नाना साहेब और तात्या टोपे। कानपुर एक मजबूत विद्रोही केंद्र के रूप में उभरा।
- लखनऊ (अवध): बेगम हजरत महल। अवध के विलय के बाद उन्होंने विद्रोह का नेतृत्व किया।
- बिहार (जगदीशपुर/आरा): कुंवर सिंह। बुजुर्ग होने के बावजूद उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ साहसपूर्वक लड़ाई लड़ी।
- इलाहाबाद: लियाकत अली। उन्होंने स्थानीय समर्थन जुटाया और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी।
1857 का विद्रोह क्यों विफल हुआ?
विफलता के कई स्पष्ट कारण बताता है:
- केंद्रीय नेतृत्व का अभाव: सभी विद्रोहियों को एकजुट करने वाला कोई एक नेता नहीं था। नेता अलग-अलग लड़ रहे थे।
- संसाधनों की कमी: अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार, रेलवे और टेलीग्राफ थे। विद्रोहियों के पास सीमित हथियार और खराब संचार व्यवस्था थी।
- सीमित प्रसार: विद्रोह मुख्य रूप से उत्तर भारत और मध्य भारत तक ही सीमित था। पंजाब और दक्षिण भारत जैसे बड़े क्षेत्र इससे अछूते रहे।
1857 के विद्रोह के परिणाम
हालाँकि विद्रोह विफल रहा, लेकिन इसके कारण बड़े बदलाव हुए:
- ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत: भारत सरकार अधिनियम, 1858 के तहत, ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हो गया और भारत सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के नियंत्रण में आ गया।
- वायसराय की शुरुआत: गवर्नर-जनरल का पद बदलकर वायसराय कर दिया गया। लॉर्ड कैनिंग पहले वायसराय बने।
- सेना का पुनर्गठन: सेना में भारतीय सैनिकों की संख्या कम कर दी गई और यूरोपीय सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई।
- फूट डालो और राज करो: इस नीति को और मजबूत किया गया।
विद्रोह का ऐतिहासिक महत्व
इस विद्रोह ने:
- अंग्रेजों की कमजोरियों को उजागर किया।
- धर्म और क्षेत्र से ऊपर उठकर भारतीयों को एकजुट किया।
- भविष्य के स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित किया।
इसने बाद के संघर्षों के लिए नींव रखी जिसका नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, महात्मा गांधी और क्रांतिकारी नेताओं ने किया।





