हनुमान भक्तों के लिए संकटमोचन हनुमानाष्टक एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसे पढ़ने से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। यदि आप Hanuman Ashtak Lyrics PDF डाउनलोड करना चाहते हैं, तो यहां आपको बजरंग बाण PDF, संकट मोचन हनुमान चालीसा, और बाल समय रवि भक्ष लियो PDF Download की सुविधा भी मिलेगी।
हनुमान अष्टक के फायदे
- जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति
- नकारात्मक ऊर्जा और भय को दूर करना
- आत्मबल और साहस में वृद्धि
- भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करना
आप यहां Hanuman Ashtak Free Download कर सकते हैं और हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान अष्टक जैसे पवित्र ग्रंथों का लाभ उठा सकते हैं। संकट के समय संकट मोचन हनुमानाष्टक पाठ का जाप अवश्य करें और श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें!
Hanuman Ashtak Lyrics PDF Free Download
हनुमान अष्टक का पाठ करने से बजरंगबली आपके सारे दुखों को मिटा देते हैं तथा आपको आजीवन खुशाल जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। हनुमान अष्टक पाठ हिंदी पीडीएफ में आपको बजरंगबली जी की आरती, पूजा विधि तथा अन्य चीज़े पढ़ने को मिलेंगी।
श्री हनुमान अष्टक पाठ हिन्दू-धर्म का सर्वमान्य ग्रन्थ है। इसमें बजरंगबली जी की कृपा के सुन्दर इतिहास के साथ अनेक रहस्य भरे हैं। सभी भक्त इस ग्रन्थ का श्रद्धापूर्वक पाठ करके कामनासिद्धि तथा निष्काम भक्त दुर्लभ मोक्ष प्राप्त करते हैं। इस पोस्ट में आप बड़ी आसानी से Sankat Mochan Hanuman Ashtak PDF in Sanskrit / संकट मोचन हनुमान अष्टक पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।
भक्तजनों को हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद हनुमान चालीसा आरती भी जरुर करनी चाहिए। उत्तर भारत की तो अधिकांश उत्तर भरतीय क्षेत्रों में हनुमान जयंती का पर्व चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्री हनुमान तांडव स्तोत्र का पाठ करते समय पूर्ण पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए तभी हमें हनुमान जी की विशेष कृपा मिलती है। जो भी व्यक्ति श्री हनुमान रक्षा स्तोत्र का पाठ करता है उस पर श्री हनुमान जी की कृपा के साथ-साथ भगवान् श्री राम जी की कृपा भी बनी रहती है।
भक्तजन हनुमान जी के 108 नाम पढ़ कर उन्हें आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं ताकि उनकी दया-दृष्टि हम पर बनी रहे। पाकर अपने जीवन को उत्तम बन सकते हैं। श्री हनुमान वंदना का नियमित पाठ करने से घर में किसी भी प्रकार की भूत-प्रेत की परेशानी को टाला जा सकता है। हनुमान साठिका तुलसीदास जी की ही एक अत्यधिक महत्वपूर्ण रचना है। इसका पाठ करने से हनुमान जी बहुत ही जल्दी कृपा करते हैं।
हनुमान जी की भक्ति में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और संकट मोचन हनुमान अष्टक के पाठ का विशेष महत्व है।
इन सभी पाठ, भजन को भगवान हनुमान के परम भक्त संत श्री गोस्वामी तुलसी दास द्वारा 16वी शताब्दी मे लिखा गया था।
हनुमान जी भगवान शंकर जी के अवतार है और उन्हें देवताओं से भी असीमित शक्तियो का वरदान प्राप्त था। बचपन में हनुमान जी बहुत ही नटखट थे और बालपन के खेल खेल में की गई उनकी शरारतो से परेशान होकर भृगुवंश ऋषियो द्वारा उन्हें बचपन में श्राप मिला था कि वे अपनी सभी शक्तियों को भूल जायेंगे व किसी दूसरे के द्वारा याद दिलाये जाने पर ही उन्हें अपनी शक्तियों का ज्ञान होगा।
संकट मोचन हनुमान अष्टक के पाठ द्वारा भक्त हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराते है और हनुमान जी से अपने सभी संकट दूर करने की प्रार्थना करते है।
हर संकट से मुक्ति के लिए संकटमोचन हनुमानाष्टक का करें पाठ किसी भी प्रकार का कैसा भी बड़ा और भीषण संकट हो संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ अत्यंत प्रभावकारी है। हनुमान जयंती पर इस पाठ से हर बाधा का नाश होता है और संकटों का अंत होता है।
Hanuman Ashtak Lyrics
बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों I
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो I
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो I
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो I
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो I
चौंकि महामुनि साप दियो तब ,
चाहिए कौन बिचार बिचारो I
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो I को
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो I
जीवत ना बचिहौ हम सो जु ,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो I
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब ,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो I को
रावण त्रास दई सिय को सब ,
राक्षसी सों कही सोक निवारो I
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,
जाए महा रजनीचर मरो I
चाहत सीय असोक सों आगि सु ,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो I को
बान लाग्यो उर लछिमन के तब ,
प्राण तजे सूत रावन मारो I
लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो I
आनि सजीवन हाथ दिए तब ,
लछिमन के तुम प्रान उबारो I को
रावन जुध अजान कियो तब ,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो I
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल ,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु ,
बंधन काटि सुत्रास निवारो I को
बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो I
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि ,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो I
जाये सहाए भयो तब ही ,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो I को
काज किये बड़ देवन के तुम ,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो I
कौन सो संकट मोर गरीब को ,
जो तुमसे नहिं जात है टारो I
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,
जो कछु संकट होए हमारो I को
|| दोहा ||
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I
वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II