Durga Saptashati Path

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The दुर्गा सप्तशती PDF in Sanskrit download includes all 13 chapters (700 verses), covering दुर्गा सप्तशती कवच हिंदी में, 12 अध्याय संस्कृत संपूर्ण पाठ, स्तोत्र, और श्री पाठ विधि सहित. Whether you are a student, devotee, or someone preparing for Navratri path, this Durga Saptashati Path Book/Pustak PDF Free Download is perfect for easy reading and printing.

Durga Saptashati is a part of the Markandeya Purana and beautifully narrates the divine story of Goddess Durga defeating the demon Mahishasura. It highlights her different forms and divine powers, making it a deeply spiritual and inspiring text. Reciting the Durga Saptashati is believed to bring protection, positivity, and blessings into one’s life, especially during festivals like Navratri.

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Durga Saptashati Path in Hindi – Sanskrit

दुर्गा सप्तशती माँ दुर्गा का सबसे प्राचीन व् सबसे शक्तिशाली पाठ है| पाठ में कुल मिलाकर 700 श्लोक हैं जिनमें से 535 पूर्ण श्लोक 108 अर्ध श्लोक और 57 उवाच है| दुर्गा सप्तशती पाठ के तीन भाग है, प्रथम चरित्र, मध्यम चरित्र व् उत्तम चरित्र| प्रथम चरित्र की देवी महाकाली, मध्यम चरित्र की देवी महालक्ष्मी व् उत्तम चरित्र की देवी महासरस्वती है और माँ दुर्गा की प्रसन्नता के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है|

दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोक शक्ति सूत्र है इनमे परम सुख प्रदान करने वाली असाधारण शक्ति समाहित है| माता का यह पाठ जीवन में सौभाग्य का साथ पाने के लिए और इच्छाओ को पूरा करने के लिए एक अचूक उपाय माना जाता है| नीचे स्क्रॉल कर आप दुर्गा सप्तशती PDF मुफ्त डाउनलोड कर सकते है|

पाठ करने की विधि

  • साधक स्नान करके पवित्र हो
  • आसन-शुद्धिकी क्रिया सम्पन्न करकें शुद्ध आसनपर बैठे;
  • साथमें शुद्ध जल,
  • पूजनसामग्री और श्रीदुर्गासप्तशतीकी पुस्तक रखे।
  • पुस्तकको अपने सामने काष्ठ आदिके शुद्ध आसनपर विराजमान कर दे।
  • ललाटमें अपनी रुचिके अनुसार भस्म, चन्दन अथवा रोली लगा ले,
  • शिखा बाँध ले;
  • पूर्वाभिमुख होकर तत्त्व-शुद्धिके लिये।
  • चार बार आचमन करे।
  • उस समय अग्रांकित चार मन्त्रोंको क्रमशः पढ़े

श्री दुर्गासप्तशती पाठ करने से पहले

यह विधि यहाँ संक्षिप्त रूपसे दी जाती है। नवरात्र आदि विशेष अवसरोपर तथा शतचण्डी आदि अनुष्ठानों में विस्तृत विधिका उपयोग किया जाता है।

उसमें यन्त्रस्थ कलश, गणेश, नवग्रह, मातृका, वास्तु सप्तर्षि सप्तचिरंजीव, ६४ योगिनी, ५० क्षेत्रपाल तथा अन्यान्य देवताओंकी वैदिक विधिसे पूजा होती है।

अखण्ड दीपकी व्यवस्था की जाती है। देवीप्रतिमाको अंगन्यास और अग्न्युत्तारण आदि विधिके साथ विधिवत् पूजा की जाती है।

नवदुर्गापूजा, ज्योति:पूजा, बटुक-गणेशादिसहित कुमारीपूजा, अभिषेक, नान्दीश्राद्ध, रक्षाबन्धन, पुण्याहवाचन, मंगलपाठ, गुरुपूजा. तीर्थावाहन, मन्त्र-स्नान आदि, आसनशुद्धि प्राणायाम, भूतशुद्धि प्राणप्रतिष्ठा, अन्तर्मातृकान्यास, बहिर्मातृकान्यास, सृष्टिन्यास, स्थितिन्यास, शक्तिकलान्यास, शिवकलान्यास, हृदयादिन्यास, पोढान्यास, विलोमन्यास, तत्वन्यास, अक्षरन्यास, व्यापकन्यास, ध्यान, पीठपूजा, विशेषा, क्षेत्रकोलन, मन्त्रपूजा, विविध मुद्राविधि, आवरणपूजा एवं प्रधानपूजा आदिका शास्त्रीय पद्धतिके अनुसार अनुष्ठान होता है।

इस प्रकार विधिसे पूजा करनेकौं इच्छावाले भक्तोंको अन्यान्य पूजा-पद्धतियों को सहायता से भगवतीको आराधना करके पाठ आरम्भ करना चाहिये।

श्री दुर्गासप्तशती पाठ करने के परिणाम

नवरात्र में हर रोज दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हर तरह के संकट से मुक्ति मिलती है। पाठ के हर अध्याय का अलग-अलग फल मिलता है और सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। सप्तशती के पाठ के बाद दान जरूर करना चाहिए।

1. भाव सहित पाठ करने से व्यक्ति में भाव का वलय निर्माण होता है। ईश्वरीय तत्त्व का प्रवाह श्री दुर्गासप्तशती ग्रंथ में आकृष्ट होता है।

  • ग्रंथ में उसका वलय निर्माण होता है।
  • ईश्वरीय तत्त्व का प्रवाह पाठ करने वाले व्यक्ति की ओर आकृष्ट होता है।
  • व्यक्ति में उसका वलय निर्माण होता है।

2. संस्कृत शब्दों के कारण चैतन्य का प्रवाह श्री दुर्गासप्तशती ग्रंथ में आकृष्ट होता है।

  • ग्रंथमें चैतन्य का वलय निर्माण होता है।
  • चैतन्य के वलयों से प्रवाह का प्रक्षेपण पाठ करनेवाले की ओर होता है।
  • व्यक्ति में चैतन्य का वलय निर्माण होता है।
  • पाठ करनेवाले के मुख से वातावरण में चैतन्य के प्रवाह का प्रक्षेपण होता है।
  • चैतन्य के कण वातावरण में फैलकर दीर्घकाल तक कार्यरत रहते हैं।

4. श्री दुर्गासप्तशती ग्रंथ में मारक शक्ति का प्रवाह आकृष्ट होता है।

  • ग्रंथ में मारक शक्ति के वलय की निर्मिति होती है।
  • इस वलय द्वारा पाठ करनेवाले की ओर शक्ति के प्रवाह का प्रक्षेपण होता है।
  • व्यक्ति में मारक शक्ति का वलय का निर्माण होता है।
  • मारक शक्ति के वलय से देह में शक्ति के प्रवाहों का संचार होता है।
  • शक्ति के कण देह में फैलते हैं।
  • पाठ करते समय व्यक्ति के मुखसे वातावरण में मारक शक्ति के प्रवाह का प्रक्षेपण होता है।
  • मारक शक्ति के कण वातावरण में फैलकर अधिक समय तक कार्यरत रहते हैं।
  • यह पाठ नौ दिन करने से आदिशक्ति स्वरूप मारक शक्ति का प्रवाह व्यक्ति की ओर आता रहता है।

5. पाताल की बलशाली आसुरी शक्तियों द्वारा व्यक्ति के देह पर लाया गया काली शक्ति का आवरण तथा देह में रखी काली शक्ति नष्ट होते हैं।
6. व्यक्ति के देह के चारों ओर सुरक्षा कवच निर्माण होता है।

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा भी सालभर भक्तजन सप्तशती का पाठ कर देवी मां को प्रसन्न कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।

Durga Saptashati Path pdf free download

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  • PDF Name:   Durga Saptashati
    Author :   PDFSeva
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