Sankat Nashan Ganesh Stotra pdf free download: अगर आप संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित pdf खोज रहे हैं, या जानना चाहते हैं कि संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ कैसे करें और इसके क्या लाभ हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ आपको स्तोत्र का परिचय, संपूर्ण जानकारी, पाठ विधि, लाभ और PDF डाउनलोड से संबंधित मार्गदर्शन मिलेगा।
यह पवित्र स्तोत्र Narada Purana में वर्णित है, इसलिए इसे नारद पुराण संकटनाशन गणेश स्तोत्र भी कहा जाता है। भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता माना जाता है, और यह स्तोत्र जीवन के संकटों को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र क्या है?
संकटनाशन गणेश स्तोत्र भगवान गणपति की स्तुति में रचा गया एक शक्तिशाली स्तोत्र है। इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट, बाधाएँ और मानसिक तनाव कम होते हैं।
यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो:
- बार-बार आने वाली बाधाओं से परेशान हैं
- परीक्षा, नौकरी या व्यवसाय में सफलता चाहते हैं
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाना चाहते हैं
संकटनाशन गणेश स्तोत्र Lyrics (संक्षिप्त रूप)
॥ श्री गणेशायनमः ॥
नारद उवाच –
प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।
भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।
तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥3॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर: ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8॥
॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
द्वादश नामों का उल्लेख भी इस स्तोत्र का महत्वपूर्ण भाग है, जिनका स्मरण करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं।
यदि आप संपूर्ण संकटनाशन गणेश स्तोत्र lyrics हिंदी अर्थ सहित पढ़ना चाहते हैं, तो PDF संस्करण अधिक सुविधाजनक रहता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र (सार्थक)
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये ॥१॥
अर्थ: गौरी पुत्र भगवान विनायक को सिर झुकाकर प्रणाम करें। अपनी आयु, कामनाओं और अर्थ (धन) की सिद्धि के लिए भक्तों के हृदय में निवास करने वाले गणेश जी का नित्य स्मरण करना चाहिए।
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् । तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥२॥
अर्थ: उनका पहला नाम वक्रतुंड (टेढ़ी सूंड वाले), दूसरा एकदंत (एक दांत वाले), तीसरा कृष्णपिंगाक्ष (काली और भूरी आंखों वाले) और चौथा गजवक्त्र (हाथी के मुख वाले) है।
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च । सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥३॥
अर्थ: पांचवां नाम लम्बोदर (बड़े पेट वाले), छठा विकट (विकराल), सातवां विघ्नराज (विघ्नों के स्वामी) और आठवां धूम्रवर्ण (धुएं के समान धूसर रंग वाले) है।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् । एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥४॥
अर्थ: नौवां नाम भालचंद्र (जिनके मस्तक पर चंद्रमा है), दसवां विनायक, ग्यारहवां गणपति और बारहवां नाम गजानन है।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥५॥
अर्थ: जो मनुष्य इन बारह नामों का तीनों संध्याओं (सुबह, दोपहर और शाम) में पाठ करता है, उसे किसी भी प्रकार के विघ्न का भय नहीं रहता। यह पाठ सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाला है।
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥६॥
अर्थ: इसका पाठ करने से विद्यार्थी को विद्या, धन की इच्छा रखने वाले को धन, पुत्र की इच्छा रखने वाले को पुत्र और मोक्ष की इच्छा रखने वाले को सद्गति प्राप्त होती है।
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् । संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥७॥
अर्थ: इस स्तोत्र का जप करने से छह महीने में फल की प्राप्ति होने लगती है और एक वर्ष तक निरंतर पाठ करने से अभीष्ट सिद्धि प्राप्त हो जाती है, इसमें कोई संदेह नहीं है।
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् । तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥८॥
अर्थ: जो व्यक्ति इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों को दान करता है, भगवान गणेश की कृपा से उसे समस्त विद्याओं का ज्ञान प्राप्त हो जाता है।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ कैसे करें?
सही विधि से पाठ करने पर इसका प्रभाव अधिक माना जाता है।
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएँ।
- श्रद्धा और एकाग्रता के साथ स्तोत्र का पाठ करें।
- कम से कम 11, 21 या 108 दिनों तक नियमित पाठ करें।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ चतुर्थी तिथि पर विशेष फलदायी माना जाता है, खासकर संकष्टी चतुर्थी के दिन।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र के लाभ
नियमित पाठ से मिलने वाले प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- जीवन के विघ्न और बाधाओं का नाश
- कार्यों में सफलता और शुभ फल
- मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि
- शिक्षा और करियर में उन्नति
- परिवार में सुख-समृद्धि
कई भक्त मानते हैं कि सच्ची श्रद्धा से किया गया पाठ व्यक्ति के कर्म मार्ग को सरल बनाता है।
नारद पुराण संकटनाशन गणेश स्तोत्र का महत्व
चूँकि यह स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। पुराणों में वर्णित स्तोत्रों को अत्यंत प्रभावशाली और सिद्ध माना गया है।
विदेशों में रहने वाले भक्त, विशेषकर USA और अन्य देशों में बसे भारतीय, इस स्तोत्र को ऑनलाइन PDF के माध्यम से पढ़ना अधिक सुविधाजनक पाते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQ)
1. संकटनाशन गणेश स्तोत्र किस ग्रंथ में मिलता है?
यह स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित है।
2. संकटनाशन गणेश स्तोत्र के लाभ क्या हैं?
इसके नियमित पाठ से जीवन के संकट दूर होते हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
3. संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
प्रतिदिन प्रातःकाल या संकष्टी चतुर्थी के दिन करना शुभ माना जाता है।
4. क्या संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित PDF उपलब्ध है?
हाँ, कई धार्मिक वेबसाइट्स और प्रकाशन संस्थाएँ हिंदी अर्थ सहित PDF प्रदान करती हैं।
Sankat Nashan Ganesh Stotra PDF Download
यदि आप संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित pdf डाउनलोड करना चाहते हैं, तो ध्यान रखें कि PDF में निम्न बातें अवश्य हों:
- संपूर्ण संस्कृत श्लोक
- शुद्ध हिंदी अर्थ
- स्पष्ट और पढ़ने योग्य फॉन्ट
- सरल पाठ विधि
- लाभ और महत्व की जानकारी
PDF डाउनलोड करने से आप इसे मोबाइल, टैबलेट या प्रिंट में आसानी से उपयोग कर सकते हैं।





