ऋणमोचक मंगल स्तोत्र PDF उन भक्तों के लिए अत्यंत उपयोगी है, जो कर्ज, आर्थिक संकट और मंगल दोष से मुक्ति पाना चाहते हैं। ऋणमोचक मंगल स्तोत्र एक प्राचीन और प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। यह स्तोत्र मंगल देव (भूमिपुत्र) को समर्पित है और विशेष रूप से ऋण से मुक्ति, धन प्राप्ति तथा आर्थिक स्थिरता के लिए पढ़ा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह कर्ज, साहस, भूमि और संपत्ति का कारक होता है। यदि कुंडली में मंगल अशुभ फल दे रहा हो, तो ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का नियमित पाठ मंगल ग्रह को शांत करता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम लाता है। इस पोस्ट में आप ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का महत्व, पाठ विधि, लाभ और PDF डाउनलोड जानकारी विस्तार से जानेंगे।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र एक अत्यंत प्रभावशाली और प्राचीन स्तोत्र है, जिसका वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है—
‘ऋण’ (कर्ज) + ‘मोचक’ (मुक्ति देने वाला)—यह स्तोत्र विशेष रूप से आर्थिक बाधाओं, भारी कर्ज और मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए पढ़ा जाता है।
यह स्तोत्र मंगल देव (भूमिपुत्र) को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह कर्ज, साहस, भूमि और संपत्ति का कारक होता है। यदि कुंडली में मंगल अशुभ फल दे रहा हो, तो ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का महत्व और लाभ
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:
1. कर्ज से मुक्ति
जो लोग लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हैं, उनके लिए यह स्तोत्र रामबाण उपाय माना जाता है।
2. आर्थिक स्थिरता
आय के नए स्रोत बनते हैं और रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावनाएँ बढ़ती हैं।
3. मंगल दोष का निवारण
यदि कुंडली में मंगल दोष या अशुभ मंगल हो, तो इस स्तोत्र के पाठ से मंगल ग्रह शांत होता है।
4. ऊर्जा और आत्मविश्वास
मंगल देव साहस और पराक्रम के देवता हैं। उनके स्तोत्र से आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और निर्णय क्षमता बढ़ती है।
5. भूमि और संपत्ति संबंधी लाभ
भूमि, मकान या संपत्ति से जुड़े विवादों को सुलझाने में भी यह स्तोत्र सहायक होता है।
ऋणमोचक मंगल स्तोत्र पाठ विधि
अधिकतम फल प्राप्त करने के लिए नीचे दी गई विधि से पाठ करें:
दिन और समय
- किसी भी मंगलवार से पाठ आरंभ करें
- ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय श्रेष्ठ माना गया है
पूजा स्थान
- हनुमान जी या मंगल देव की प्रतिमा के सामने
- लाल रंग के आसन पर बैठकर पाठ करें
दीपक
- चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएँ
भोग
- मंगल देव को लाल पुष्प और गुड़-चना अर्पित करें
संकल्प
- हाथ में जल लेकर अपना नाम और गोत्र बोलें
- कर्ज मुक्ति का संकल्प लें और फिर स्तोत्र पाठ प्रारंभ करें
ऋणमोचक मंगल श्लोक Lyrics
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः ।
स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥1॥
लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः ।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥2॥
अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः ।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥3॥
एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत् ।
ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात् ॥4॥
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् ।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥5॥
स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः ।
न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित् ॥6॥
अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल ।
त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय ॥7॥
ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः ।
भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ॥8॥
अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः ।
तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात् ॥9॥
विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा ।
तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः ॥10॥
पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः ।
ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः ॥11॥
एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम् ।
महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा ॥12॥
णमोचक मंगल स्तोत्र पाठ में सावधानियाँ
- पाठ के समय पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें
- मंगलवार के दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) से परहेज करें
- संभव हो तो नियमित रूप से 21 या 108 बार पाठ करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. ऋणमोचक मंगल स्तोत्र कितने दिन पढ़ना चाहिए?
➡️ कम से कम 21 मंगलवार या 40 दिन तक नियमित पाठ करना उत्तम माना जाता है।
Q. क्या इसे बिना दीक्षा के पढ़ सकते हैं?
➡️ हाँ, कोई विशेष दीक्षा आवश्यक नहीं है। श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण है।
Q. क्या महिलाएँ भी यह स्तोत्र पढ़ सकती हैं?
➡️ बिल्कुल, यह स्तोत्र पुरुष और महिलाएँ दोनों पढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
यदि आप कर्ज, आर्थिक तंगी या मंगल दोष से परेशान हैं, तो ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का नियमित पाठ आपके जीवन में धन, स्थिरता और मानसिक शांति ला सकता है।
इस स्तोत्र को मंगलवार से अवश्य प्रारंभ करें और मंगल देव की कृपा प्राप्त करें।