श्री विश्वकर्मा जी की आरती लिरिक्स हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, विशेषकर कारीगरों, इंजीनियरों, शिल्पकारों और व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए। इस पोस्ट में हम आपके लिए free Vishwakarma Aarti PDF file in Hindi उपलब्ध करा रहे हैं, जिसमें Vishwakarma Ji Ki Aarti लिखित में साफ़, सरल और पढ़ने योग्य हिंदी फ़ॉन्ट में दी गई है। यदि आप Free PDF विश्वकर्मा जी की आरती लिखित में 2023 खोज रहे हैं, तो यह पेज आपके लिए एकदम सही है। यहाँ से आप आरती के पूरे लिरिक्स पढ़ सकते हैं और प्रिंटेबल PDF को फ्री में डाउनलोड कर पूजा, व्रत या विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर उपयोग कर सकते हैं।
भारतीय संस्कृति में देवताओं और देवियों की पूजा एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। विश्वकर्मा जी भी ऐसे प्रमुख देवता हैं, जिनकी पूजा और आराधना का विशेष महत्व है। उन्हें विशेष रूप से कार्मिक और शिल्पकारों के देवता के रूप में जाना जाता है, और विश्वकर्मा आरती उनके जीवन और कार्यों की महत्वपूर्ण भाग है। इस लेख में, हम विश्वकर्मा आरती के महत्व और महत्वपूर्ण श्लोकों का मूल्यांकन करेंगे।
विश्वकर्मा देवता कौन हैं?
विश्वकर्मा जी भारतीय पौराणिक ग्रंथों में एक प्रमुख देवता हैं जिन्हें सर्वश्रेष्ठ शिल्पकार और विश्वकर्मा कहा जाता है। वे सृजनात्मकता, कार्मिकता, और तकनीकी नौकरियों के प्रतीक माने जाते हैं। विश्वकर्मा जी का दर्शन करने वाले लोग मन्ने, द्वितीया और चतुर्थी तिथियों को उनके पूजन में विशेष रूप से मनाते हैं।
Vishwakarma Aarti Lyrics
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
विश्वकर्मा की आरती का महत्व
विश्वकर्मा आरती एक प्राचीन परंपरागत पूजा विधि है, जो उनके भक्तों द्वारा प्रतिदिन अद्भुत भक्ति और समर्पण के साथ की जाती है। यह आरती विश्वकर्मा जी की महिमा को गाती है और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है। इस आरती का उद्देश्य उनके श्रेष्ठता और सृजनात्मक शक्तियों को स्तुति देना है और उनके आशीर्वाद के साथ शुभकामनाएँ प्रदान करना है।
विश्वकर्मा की आरती के महत्वपूर्ण श्लोक
- जय विश्वकर्मा प्रभु: यह श्लोक विश्वकर्मा जी के महत्व को प्रकट करता है और उनकी प्रशंसा करता है। भक्त इस श्लोक के माध्यम से विश्वकर्मा जी के सामर्थ्य को स्तुति देते हैं और उनकी कृपा की आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
- जय विश्वकर्मा सकल जगत के निर्माता: यह श्लोक विश्वकर्मा जी को सभी सृजनात्मक कार्यों के प्राथमिक स्वामी के रूप में प्रशंसा करता है। वे सभी जीवों के निर्माता के रूप में माने जाते हैं और उनकी आराधना का उद्देश्य सृजनात्मकता की महत्वपूर्णता को स्पष्ट करना है।
- विश्वकर्मा आरती: यह श्लोक आरती का शुरुआती भाग है और विश्वकर्मा जी की महिमा को गाता है। भक्त इस आरती के माध्यम से देवता की प्रशंसा करते हैं और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
- विश्वकर्मा आरती के मंत्र: इस श्लोक में आरती के मंत्र दिए गए हैं, जिन्हें भक्त आरती के समय पढ़ते हैं। इन मंत्रों का पाठ करने से भक्त विश्वकर्मा जी के सन्देश को समझते हैं और उनके साथ अपनी आराधना करते हैं।
विश्वकर्मा की आरती के फायदे
विश्वकर्मा आरती का पाठ करने के कई फायदे होते हैं। यह न केवल आध्यात्मिक माहौल में शांति और सुख का अहसास कराता है, बल्कि यह भी कार्मिकता, शिल्पकला और सृजनात्मकता के क्षेत्र में सफलता के प्रतीक है।
- आराधना और आशीर्वाद: विश्वकर्मा आरती का पाठ करने से विश्वकर्मा जी के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। यह आरती भक्तों को उनके कार्यों में सफलता और सृजनात्मक उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद करती है।
- शिल्पकला में सुधार: विश्वकर्मा आरती के पाठ से कार्मिक और शिल्पकार अपने कौशल में सुधार कर सकते हैं। यह उन्हें सृजनात्मकता और नौकरी के क्षेत्र में समर्थ बनाता है।
- आध्यात्मिक सांत्वना: विश्वकर्मा आरती का पाठ करने से आध्यात्मिक सांत्वना मिलती है। भक्त इसके माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिकता की दिशा में दिशा देते हैं और अपने आदर्शों के प्रति समर्पित रहते हैं।
विश्वकर्मा की आरती का पाठ कैसे करें
विश्वकर्मा जी की आरती का पाठ करने के लिए कुछ आवश्यक चीजें होती हैं:
- आरती का पाठकर्ता: आरती का पाठ एक शुद्ध और आदर्श भावनाओं के साथ किया जाना चाहिए। यह आपके भक्तिभाव को दर्शाता है और विश्वकर्मा जी के प्रति आपकी भक्ति की महत्वपूर्णता को स्पष्ट करता है।
- आरती की थाली: आरती की थाली में दीपक, फूल, रोली, अक्षत, और पूजन सामग्री की व्यवस्था करें। यह सामग्री पूजा के लिए आवश्यक होती है।
- आरती के गाने: विश्वकर्मा जी की आरती का गाना बड़े आनंद से और भक्ति भाव से करें। इसे आराम से गाने के लिए समय लें और देवता के प्रति अपनी श्रद्धा और आदर्श के साथ गाएं।
- आरती के दीपक का प्रदीपन: आरती के दीपक को प्रदीपित करें और देवता के सामने प्रस्तुत करें। इसके साथ ही, आरती के दीपक को देवता के चारणों के समीप घुमाएं।
विश्वकर्मा की आरती के लाभ
विश्वकर्मा जी की आरती का पाठ करने से भक्तों को कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं:
- आत्मा की शांति: आरती का पाठ करने से मानसिक शांति और सुख का अहसास होता है। यह भक्तों को तनाव से मुक्ति दिलाता है और मानसिक चैन की अनुभूति कराता है।
- कार्यों में सफलता: विश्वकर्मा जी की आरती का पाठ करने से कार्मिकता और व्यवसाय में सफलता प्राप्त हो सकती है। यह व्यक्तिगत और पेशेवर उत्कृष्टता में मदद करता है।
- आध्यात्मिक साधना: आरती का पाठ करने से भक्त अपने आध्यात्मिक साधना में आगे बढ़ सकते हैं। यह उन्हें आत्मा की ऊंचाइयों की ओर प्रेरित करता है और उनकी आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में मदद करता है।
- परिवार की खुशियां: विश्वकर्मा आरती का पाठ करने से परिवार की खुशियां और सामृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। यह परिवार के सदस्यों को सुख और समृद्धि में भाग्यशाली बना सकता है।
समापन
विश्वकर्मा आरती एक प्रमुख पूजा प्रथा है जो विश्वकर्मा जी के उपासकों के लिए महत्वपूर्ण है। यह पूजा देवता की महिमा को गाती है और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है। इसके अलावा, यह भक्तों को कार्मिकता और शिल्पकला में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
विश्वकर्मा आरती का पाठ आध्यात्मिक और प्रासादिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह भक्तों को अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है और उन्हें दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।